हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने आए छात्रो ने मदरसा ए हुज्जतिया मे शहीद इमाम ख़ामेनई के चेहलुम की मरकज़ी मजलिस का आयोजन किया।
मजलिसा की शुरूआत कलाम मजीद के पाठ से हुई। उसके बाद हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद नौशाद हुसैन ने अपने अशार पेश करके शहीद इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनई को श्रृद्धांजलि अर्पित की। उनके द्वारा पढ़े गए अशार सुनने के लिए क्लिक करें।
मौलाना नौशाद साहब के बाद शायर अहले बैत जनाब शफ़ी भीकपुरी ने भी अशार के माध्यम से रमज़ान युद्द के शहीदो को श्रृद्धांजलि पेश की।
मौलाना शफ़ी हैदर द्वारा पढ़े गए अशार।
मौलाना शफ़ी भीकपुरी के बाद जनाब बाक़र काज़मी साहब ने इमाम ख़ामेनई का परिचय कराया।
परिचय के पश्चात मजलिस के खतीब और हौज़ा ए इल्मिया क़ुम के उस्ताद आयतुल्लाह अहमद आबिदी ने मजलिस को संबोधित करते हुए शहीद इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनई के कामिल नेता होने तथा नवनिर्वाचित सर्वोच्च नेता के संदर्भ मे फ़ारसी भाषा मे तक़रीर की।
आयतुल्लाह अहमद आबिदी द्वारा दिए गए भाषण को सुनने के लिए क्लिक करें।
आयतुल्लाह अहमद आबिदी के बाद मदरसा ए हुज्जतिया के प्रंबंधक आयतुल्लाह तलख़ाबी ने भी मजलिस को संबोधित करते हुए नए नेता के चरित्र पर प्रकाश डाला और अंत मे उन्होने शहीद नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई के पसंदीदा हज़रत ज़हरा (स) के मसाइब पढ़े जिन्हे सुनकर मजलिस मे शिरकत करने वाले लोगो की आंखो से आसूओ का सेलाब जारी हो गया अपनी तकरीर के अंत मे ईरान, सर्वोच्च नेता, मोमेनीन के लिए दुआ की ।
मजलिस के समापन पर नाजिम ए मजलिस जनाब बाक़र काजमी साहब ने अल्लाहो अकबर, अमेरिका मुर्दाबाद, इस्राईल मुर्दाबाद जैसे गगन भेदी नारे लगाए जिससे मदरसा ए हुज्जतिया की मजस्दि गूंज उठी।
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